साहित्य के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू रहे युवा लेखक अर्पित सर्वेश को उस समय विशेष सम्मान प्राप्त हुआ जब उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री राजेंद्र प्रताप सिंह “मोती सिंह” जी ने अपने निज आवास पर उन्हें सम्मानित किया। यह सम्मान अर्पित सर्वेश को उनके असाधारण साहित्यिक योगदान, बहुभाषीय लेखन, और भारतीय संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाने के लिए प्रदान किया गया।
यह सम्मान न केवल अर्पित सर्वेश की प्रतिभा का उत्सव था, बल्कि प्रतापगढ़ की उस मिट्टी का गौरव भी, जिसने एक ऐसे युवा को जन्म दिया जिसने अपने शब्दों से भारत की संस्कृति, भाषा और भावनाओं को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाया।
कार्यक्रम में मोती सिंह जी ने अर्पित की सराहना करते हुए कहा —
“अर्पित सर्वेश जैसे युवाओं पर पूरा देश गर्व कर सकता है। 22 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने जो अद्भुत साहित्यिक योगदान दिया है, वह किसी स्वप्न से कम नहीं। अर्पित का लेखन भारतीय संस्कृति की आत्मा को आधुनिक दृष्टि से प्रस्तुत करता है। वे न केवल प्रतापगढ़ की शान हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा-स्रोत हैं।”
सम्मान प्राप्त करते हुए अर्पित सर्वेश ने विनम्र भाव से कहा —
“मैं यह सम्मान अपने जनपद, अपने माता-पिता और उन सभी लोगों को समर्पित करता हूँ जिन्होंने मुझ पर विश्वास रखा। यदि लगन, विश्वास और कर्मनिष्ठा साथ हो तो गाँव का कोई साधारण युवक भी विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन कर सकता है। मोती सिंह जी जैसे प्रतिनिधि हम युवाओं के लिए सदैव प्रेरक रहे हैं।”
अर्पित सर्वेश ने मात्र 22 वर्ष की आयु में 19 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में 27 पुस्तकों का लेखन कर असंभव को संभव कर दिखाया है। वे विश्व के पहले ऐसे भारतीय लेखक हैं जिन्होंने इतने कम समय में बहुभाषीय लेखन का अद्वितीय रिकॉर्ड स्थापित किया है। उनका साहित्य प्रेम, संवेदना, संस्कृति और जीवन-दर्शन का संगम है — जो पाठकों को न केवल सोचने बल्कि जीने का नया दृष्टिकोण देता है।
मोती सिंह जी द्वारा मिला यह सम्मान केवल अर्पित सर्वेश की उपलब्धियों का सम्मान नहीं, बल्कि प्रतापगढ़ की प्रतिभा, परंपरा और प्रतिष्ठा का वैश्विक उत्सव है।
यह क्षण इस बात का प्रमाण है कि जब जुनून सच्चा हो और उद्देश्य उच्च, तो एक गाँव का युवक भी पूरी दुनिया के दिलों में जगह बना सकता है।अर्पित आज प्रतापगढ़ के ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए एक मिसाल है।
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