प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश। प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे "लंगड़ा ऑपरेशन" के तहत प्रतापगढ़ जिले में हो रही पुलिस मुठभेड़ों को लेकर सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत आरटीआई एक्टिविस्ट शिवम् शुक्ला ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय से महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी हैं।
शिवम् शुक्ला द्वारा दिए गए आवेदन में उन्होंने वर्ष 2021 से जुलाई 2025 तक के पांच वर्षों में जनपद में हुई सभी पुलिस मुठभेड़ों से संबंधित कुल 13 बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। यह आरटीआई आवेदन उत्तर प्रदेश शासन की ओर से अपराध नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे अभियानों की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक अहम कदम माना जा रहा है।
शिवम् शुक्ला ने आवेदन में मांगा है कि:
1. प्रतापगढ़ में पिछले पांच वर्षों में हुई कुल मुठभेड़ों की संख्या बताई जाए।
2. प्रत्येक मुठभेड़ की तारीख, स्थान और समय का विवरण साक्ष्य सहित उपलब्ध कराया जाए।
3. मुठभेड़ों में मारे गए अथवा घायल हुए व्यक्तियों का नाम, पता, उम्र और उनके विरुद्ध दर्ज मामलों की सूची साझा की जाए।
4. क्या इन मुठभेड़ों की मजिस्ट्रेट जांच करवाई गई? यदि हां, तो उसकी रिपोर्ट दी जाए।
5. मुठभेड़ों में शामिल पुलिसकर्मियों के नाम, पद और तैनाती स्थान बताएं।
6. क्या इन घटनाओं में एफआईआर दर्ज की गई? यदि हां, तो उसकी प्रति एवं संख्या साझा की जाए।
7. क्या कोई मुठभेड़ फर्जी पाई गई? यदि हां, तो संबंधित जांच रिपोर्ट और कार्रवाई का विवरण दिया जाए।
8. क्या किसी मामले में मानवाधिकार आयोग को रिपोर्ट भेजी गई? पत्राचार की प्रतियां साझा की जाएं।
9. क्या किसी पुलिस अधिकारी पर विभागीय जांच/कार्रवाई हुई? उसकी स्थिति बताई जाए।
10. मुठभेड़ों में बरामद हथियारों, गोलियों और अन्य सबूतों का विवरण दिया जाए।
11. क्या घटनास्थल की वीडियोग्राफी/फोटोग्राफी करवाई गई थी? यदि हां, तो उसकी स्थिति बताई जाए।
12. मुठभेड़ों से संबंधित न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या व स्थिति बताई जाए।
13. मुठभेड़ों में घायल पुलिसकर्मियों अथवा आम नागरिकों के इलाज की व्यवस्था व वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए।
शिवम् शुक्ला ने यह आवेदन जन सूचना अधिकारी, कार्यालय पुलिस अधीक्षक, प्रतापगढ़ को संबोधित किया है। उनके अनुसार, इस आरटीआई का उद्देश्य मुठभेड़ों की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर प्रशासनिक कार्यवाही की स्थिति जानना है।
ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार अपराधियों के खिलाफ "ठोक दो" नीति के तहत लंगड़ा ऑपरेशन जैसी कार्रवाइयों को तेज़ी से अंजाम दे रही है, जिसके तहत कई कुख्यात अपराधियों के खिलाफ एनकाउंटर की कार्रवाई हो चुकी है। अब इन कार्रवाइयों में हुई प्रक्रियाओं की सत्यता और वैधानिकता को लेकर आरटीआई के माध्यम से जवाब मांगा जाना प्रशासन पर पारदर्शिता की जिम्मेदारी को और भी बढ़ाता है।
सूचना प्राप्त होने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि मुठभेड़ों की वास्तविकता और कानूनी प्रक्रिया में कितनी समानता पाई जाती है।
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