प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश)। रविवार को पांडेय मार्केट स्थित जलसा मैरिज हॉल (राजा पाल टंकी के निकट) में पावस काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम में जिले के प्रख्यात साहित्यकारों और युवा कवियों ने वर्षा ऋतु से जुड़ी भावनाओं, लोक अनुभूतियों और समसामयिक विषयों को प्रभावशाली काव्य प्रस्तुतियों के माध्यम से अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्याम शंकर शुक्ल 'श्याम' ने की, जबकि मुख्य अतिथि रहे पूर्व ब्लॉक प्रमुख श्री ओमप्रकाश पांडेय 'गुड्डू'। आयोजन का संयोजन पं. विरज कुमार पांडेय ने किया, जो पांडेय मार्केट के अधिष्ठाता भी हैं।
गोष्ठी का संचालन लोकप्रिय गीतकार व मंच संचालक शीतला सुजान ने अपने प्रभावी अंदाज़ में किया। वहीं शुरुआत कल्पना तिवारी ने मधुर वाणी वंदना से की, जिसने माहौल को भावपूर्ण बना दिया।
कविता पाठ में झलकी संवेदनाएं और सामाजिक सरोकार
अर्पित सर्वेश, जो जनपद की युवा साहित्यिक पहचान हैं, ने अपने शब्दों से दिल छू लेने वाली रचना प्रस्तुत की:
“नाम पढ़ा मैंने और वो मेरे दिल में समा गया,
जो सबरी का जूठा बैर चखा, वो मुझको भा गया।”
डॉ. सुधांशु उपाध्याय ने गांव और शहर की संवेदनाओं को इन पंक्तियों में बांधा:
“शहर से थोड़ा फासला रखना,
गांव आने का सिलसिला रखना।”
मुख्य अतिथि ओमप्रकाश पांडेय 'गुड्डू' की पंक्तियाँ समकालीन समाज पर करारा व्यंग्य रहीं:
“पूछ पूछ कर धर्म गोलियां मारी हैं,
खून से सींची केसर की फुलवारी है।”
संचालन कर रहे शीतला सुजान की प्रेरक रचना ने श्रोताओं को आत्ममंथन हेतु प्रेरित किया:
“ऊबड़-खाबड़ पथरीली राहों पर चलना सीखो,
जीवन जीना चाहो तो नदियों सा बहना सीखो।”
राज नारायण शुक्ल 'राजन' की भावुक रचना में पीढ़ीगत बदलाव की पीड़ा दिखी:
“मां बाप से अब हाथ मिलाने का दौर है,
हमने छुए थे पांव जमाने गुजर गए।”
अध्यक्षीय कविता में डॉ. श्याम शंकर शुक्ल 'श्याम' ने ग्रामीण लोकभाषा में गहरी भावनाएं व्यक्त कीं:
“बदरा झूमि झूमि बरसे अगनवां सजन घर नाही सखियां,
सूना सूना लागे हमरो भवनवां सजन घर नाही सखियां।”
स्थानीय साहित्यिक और सामाजिक हस्तियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में जिले की कई प्रतिष्ठित हस्तियां भी उपस्थित रहीं, जिनमें संतोष तिवारी 'निशुल्क', अशोक कुमार सिंह (व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष), विनोद पांडेय, परमानंद पांडेय एवं सुनील सिंह प्रमुख रहे।
आभार एवं समापन
समापन अवसर पर आयोजक पं. विरज कुमार पांडेय ने सभी कवियों, साहित्यप्रेमियों और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गोष्ठियां जनपद की साहित्यिक चेतना को सशक्त बनाती हैं और नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने में सहायक सिद्ध होती हैं।
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